दोस्त का जवाब बहुत समय पहले की बात है , दो दोस्त बीहड़ इलाकों से होकर शहर जा रहे थे . गर्मी बहुत अधिक होने के कारण वो बीच -बीच में रुकते और आराम करते . उन्होंने अपने साथ खाने-पीने की भी कुछ चीजें रखी हुई थीं . जब दोपहर में उन्हें भूख लगी तो दोनों ने एक जगह बैठकर खाने का विचार किया| खाना खाते – खाते दोनों में किसी बात को लेकर बहस छिड गयी ..और धीरे -धीरे बात इतनी बढ़ गयी कि एक दोस्त ने दूसरे को थप्पड़ मार दिया .पर थप्पड़ खाने के बाद भी दूसरा दोस्त चुप रहा और कोई विरोध नहीं किया ….बस उसने पेड़ की एक टहनी उठाई और उससे मिटटी पर लिख दिया “ आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा ” थोड़ी देर बाद उन्होंने पुनः यात्रा शुरू की , मन मुटाव होने के कारण वो बिना एक -दूसरे से बात किये आगे बढ़ते जा रहे थे कि तभी थप्पड़ खाए दोस्त के चीखने की आवाज़ आई , वह गलती से दलदल में फँस गया था …दूसरे दोस्त ने तेजी दिखाते हुए उसकी मदद की और उसे दलदल से निकाल दिया| इस बार भी वह दोस्त कुछ नहीं बोला उसने बस एक नुकीला पत्थर उठाया और एक विशाल पेड़ के तने पर लिखने लगा ” आज मेरे सब...
"हर सुबह एक नया मौका है — उठो, सीखो, बढ़ो और खुद को साबित करो।" 🌟 प्रेरणादायक कहानी: "एक नया सवेरा" (150 पंक्तियाँ,) गाँव के एक छोटे से कोने में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही साधारण परिवार से था। उसके पिता एक किसान थे और माँ घर संभालती थी। अर्जुन का सपना था कि वह एक दिन बड़ा आदमी बने और अपने माता-पिता का नाम रोशन करे। लेकिन हालात हमेशा उसके खिलाफ रहते थे। स्कूल में किताबें खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे, फिर भी वह टूटता नहीं था। वह अपने दोस्त से पुरानी किताबें मांग कर पढ़ाई करता था। हर दिन सूरज उगने से पहले वह खेतों में पिता की मदद करता और फिर स्कूल जाता। स्कूल से लौटते समय भी वह खेतों में काम करता। पढ़ाई में वह हमेशा अव्वल आता। गाँव के लोग उसकी मेहनत की तारीफ करते थे लेकिन कुछ लोग उसका मजाक भी उड़ाते थे। कहते, “अरे किसान का बेटा है, क्या करेगा इतना पढ़ लिख के?” लेकिन अर्जुन जानता था कि जवाब मेहनत से देना है, बातों से नहीं। एक दिन गाँव में एक प्रतियोगिता हुई, जिसमें जिले के सारे होशियार बच्चे बुलाए गए। इसमें विज्ञान परियोजना बनानी थी। अर्जुन ने अपने ...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें